नगरोटा में रिवाज बदलेगा या रहेगा जारी; जनता को आठ दिसंबर का इंतजार, गली-मोहल्लों में चर्चाओं को दौर

अखंड समाचार,नगरोटा बगवां (ब्यूरो) : रिवाज बदलेगा या जारी रहेगा, प्रदेश स्तर पर उक्त वाक्य पिछले कई महीनों से चुनाव के संदर्भ ओर 2023 की विधानसभा के लिए खूब चर्चित रहा। जिस तरह भाजपा प्रदेश स्तर पर रिवाज बदलेगा का नारा बुलंद कर रही है अगर नगरोटा बगवां में रिवाज बदला तो यहां भाजपा का अपना ही नारा उसी पर भारी पड़ सकता है ओर यहां कांग्रेस रिवाज बदलने में कामयाब हो जाएगी। हमेशा सुर्खियों में रही ओर इस बार भी मतदान की पहली रात को सुर्खियां बटोर गई नगरोटा बगवां की सीट के लिए भी एक रिवायत, रिवाज या परंपरा रही है जिसको बहुत कम लोग जानते हैं। यह रिवायत बदलेगी या जारी रहेगी इस पर कहीं चुनाव प्रचार के दिनों चर्चा तो नहीं हुई लेकिन आठ दिसंबर को आने वाले नतीजे यह सब तय करेंगे ।बता दें कि नगरोटा बगवां के पिछले अद्र्धशतक के सियासी सफर पर नजर दौड़ाएं तो हम पाएंगे कि इस सीट पर कोई भी नेता चाहे जिस किसी भी पार्टी का हो लगातार तीन बार काबिज हुआ है । इतिहास गवाह है कि वर्ष 1967 में जब कांग्रेस की ओर से चौधरी हरदयाल विधायक बने तो उन्होंने लगातार 1967, 72 और 77 में लगातार तीन चुनाव जीतकर 1982 तक नगरोटा का प्रतिनिधित्व किया । वर्ष 1982 में पार्टी भी बदली, नेता भी बदला लेकिन लगातार तीन बार एक ही आदमी को चुनने की रिवायत नहीं बदली। इस दौरान 1982, 85 और 90 में नगरोटा ने अपनी बागडोर भाजपा के रामचंद भाटिया को सौंपी जो लगातार तीन बार चुनते चले गए ।इसके उपरांत नगरोटा का भाजपा से मोह भंग हुआ तो वर्ष 1998 में कांग्रेस के जीएस बाली आए जो लगातार तीन कार्यकाल के आंकड़े को भी पार कर 1998, 2003, 2007, 2012 में चार बार विजयी हुए । वे लगातार 20 साल सत्ता में रहे । 2017 में पहली बार नए नेतृत्व के रूप में विधायक बने भाजपा के अरुण मेहरा को इस रिवायत के तहत 2022 में भी निरंतरता बनाए रखने का मौका मिलेगा, यह तय होना बाकी है। आठ दिसंबर तय करेगा कि नगरोटा बगवां का रिवाज बदलेगा या जारी रहेगा। यानी नगरोटा ने रिवाज बदला तो कांग्रेस सत्तासीन होगी और रिवाज बरकरार रहा तो भाजपा रिपीट करेगी जो भाजपा के प्रादेशिक नारे से बिलकुल उलट है। उल्लेखनीय यह भी है वर्ष 2017 में मात्र एक फीसदी के अंतर से हुआ हार जीत का फैसला अब क्या करवट लेता है जबकि नए मतदाताओं में करीब छह हजार का इजाफा हुआ है । विस क्षेत्र में अब तक की बड़ी जीत 1977 में कांग्रेस के चौधरी हरदयाल ने दर्ज की थी जिन्होंने 61 फीसदी मत प्राप्त किए थे परंतु उस समय मात्र 19 हजार मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

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